कर्म व कर्मभाव भेद

ईश्वर कृत माया (शक्ति) के तीन गुण होते हैं। 1. विषयों को जन्म देना यानि कि इच्छाओं को जन्म देना। 2. इच्छा के प्रति संवेदनशीलता। 3. इच्छा के प्रति असंवेदनशीलता। परन्तु जीव-जातक का इन गुणों के प्रति व्यवहार भिन्न भिन्न होता है। इन्हें भोगने की क्षमता भी स्वयं ने ही उत्पन्न की हुई होती है। यह क्षमता व्यक्ति के कर्मों के कारण अर्जित होती है।
विषय भोग में कोई परिवर्तन नहीं होता है। केवल उनके प्रति आनंद या अआनंद जीव के द्वारा निर्मित होता है। यह भाव ही पशु भाव, दिव्य भाव, और वीर भाव है। केवल वीर भाव ही कर्म में वृद्धि नहीं होने देता, वही मोक्ष का कारक व कारण है। बाकी दोनों दिव्यभाव व पशु भाव बार बार जन्म का कारण है।
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